तनहाई

अब हम अकेले हो गये है

जिस रास्ते मूडो तनहाई मिलने आ जाती है..

अब अकेलापन बाटा भी तो न जा सके

बास ले लो ये तनहाई छोड दो हमे अकेला 

फिर वही बारीश मुझे फिरसे मनाने आ जाऐ क्या पता…

छोडा था उन बुंदों ने साथ जब थाम लिया था हमारे दिल ने पहले प्यार का हाथ ….

आज फिर चाहे दिल वहीं बारीश वहीं बुँदे  मनाने आ जाये  

इस तनहाई को साथ ले जाये…..साथ ले जाये….

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