Blog

कुछ कवितायेँ बिना शिर्षक बनती हैं

ना तुम मेरी हो, ना किसी और की अपने आप में संपुर्ण हो। ना ज़रूरत तुम्हें बेबसी की, तुम आत्मा हो, शक्ति भी ; तुम कल थी, तुम आज हो, तुम अभी हो, तुम कल का वादा ना करना,परिवर्तन संसार का नियम जो है; जो आज हैं वो अभी करना।

Read More कुछ कवितायेँ बिना शिर्षक बनती हैं